विष्णु भगवान की विभूति और जगत की व्यवस्था का वृतांत

श्री पराशर जी बोले पूर्व काल में महा ऋषि यों ने जब महाराजा मारुत को राजपथ पर अभिषेक किया तो लोग पितामह श्री ब्रह्मा जी ने भी क्रम से राज्यों को बांटा ब्रह्मा जी ने नक्षत्र ग्रह ब्राह्मण संपूर्ण वनस्पति एवं यज्ञ और तप आदि के राजपथ पर चंद्रमा को नियुक्त किया इसी प्रकार विश्राम के पुत्र कुबेर को राजाओं का वरुण को जल का विष्णु को आदि ओं का तथा अग्नि को वासु गानों का अधिपति नियुक्त किया दक्ष को प्रजापति यों का इंद्र को मारुत गढ़ का तथा पहलाद पौधों तथा दानों का अधिपति बनाया यमराज को प्रीत गण के राज पद पर आसीन किया तथा समस्त गजराज ओं का स्वामी एरावत को दिया पक्षियों का राजा गरुड़ को दिया देवताओं का राजा इंद्र को दिया घोड़ों का राजा उज्जैन शुरुआत को दिया तथा का अधिपति बनाया श्री ब्रह्मा जी ने वन्य पशुओं का राजा सिंह को तथा सर्पो का स्वामी शेषनाग को बनाया स्थिर ओवरों का राजा हिमालय को कपिल देव जी को मुनियों का तथा नाक और दान वाले मृत गण का राजा ब्याह बात को बनाया इसी तरह श्री ब्रह्मा जी ने अन्य समस्त जातियों के प्रधान की भी व्यवस्था थी इस प्रकार राज्यों को विभक्त करते हुए श्री ब्रह्मा जी ने सब और दिव्य पालो की स्थापना की ब्रह्मा जी ने पूर्व दिशा में वह राज्य प्रजापति के पुत्र राजा शुद्ध हवा को दिगपाल पद पर नियुक्त किया तथा दक्षिण दिशा में कर्दम प्रजापति के पुत्र राजा संघ पथ को नियुक्त किया पश्चिम दिशा में ब्रह्मा जी ने कभी छूट ना होने वाले राजस्व पुत्र महात्मा के तू मान को नियुक्त किया उत्तर दिशा में ब्रह्मा जी ने परिजन प्रजापति के पुत्र अति दुर्गंध राजा हिरण रोमा को नियुक्त किया वह आज तक सात दीप और अनेक नगरों से युक्त होकर इस संपूर्ण धरती का अपने-अपने विभाग अनुसार धर्म पूर्वक पालन कर रहे हैं
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Vibhuti of Lord Vishnu and account of the arrangement of the world
Shri Parashar ji said that in the past, when the great sages anointed Maharaja Marut on the royal path, the people's grandfather Shri Brahma also divided the kingdoms in order. Similarly Kubera, the son of Vishram, was appointed as the ruler of kings, Varuna of water, Vishnu of water, Agni of Adi, Vasu of songs, Daksha of Prajapatis, Indra of Marut Garh and Pahalad of plants and grains, Yamraj was made Preet. Ascended the kingship of Gana and gave Airavat the master of all elephants, the king of birds to Garuda, the king of gods to Indra, the king of horses to Ujjain, and made the king of wild animals, the king of lions, and Sheshnag, the master of serpents, was made the king of stable overs, Himalaya, Kapil Dev was made the sages, and marriage was made the king of dead people with nose and donation. While dividing, Shri Brahma ji established all the other divine palaces. Brahma ji appointed King Shuddha Hawa, son of Rajya Prajapati as Digpal, in the east direction and appointed King Sanghapath, son of Kardam Prajapati, in the west direction. In the North, Brahma ji appointed Mahatma K Tu Maan, the son of revenue who would never be exempted. are following religiously according to their respective departments
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