आप पहले तो सहस्त्र उपयुक्त बहुत प्रकार के अनुष्ठान रूप कर्मों का त्याग करने के लिए कहत…
आत्म तत्वों को जानने वाले संख्या योगो की निष्क्रिय आत्म स्वरूप से स्थित रूप ज्ञान योग …
इससे क्या मतलब चाहे आत्मा वैधता द्वारा किए हुए सन्यास और कर्म योग की कल्याण कर कारक कर…
कर्म मान्य कर्म पक्ष इस बात को लेकर सा युक्त कृतार्थ कम कृतार्थ ज्ञान अग्नि डी कर्मणा …
ज्ञान के समान पवित्र करने वाला शुद्ध करने वाला इस लोक में दूसरा कोई नहीं है कर्म योग य…
वह ज्ञान जिस विधि से प्राप्त होता है वह तू जान यानी सुन आचार्य के समीप जाकर भली भांति …
अन्य कितने ही अन्यथा हरि अर्थात जिसे आहार नृत्य किया हुआ है ऐसे परिणीति भोजन करने वाले…
Social Plugin