छतरी के लिए जो युद्ध रूप स्वधर्म है उसे देखकर भी तुझे कुपित होना उचित नहीं है अभिप्राय…
जैसे जगत में मनुष्य पुराने जिन वेस्टन को त्याग कर अन्य नवीन वेस्टन को ग्रहण करते हैं व…
यह आत्मा उत्पन्न नहीं होता अर्थात उत्पत्ति स्वरूप वास्तु विकार आत्मा में नहीं होता और …
नष्ट न होना जिसका स्वभाव है वह अविनाशी है तू शब्द सत्य से सत्य की विशेषता दिखाने के लि…
वास्तव में आप विद्यमान शीतोष्ण उसने आदि का और उनके कर्म का भाव आनापान अर्थात अवस्था अस…
जो शोक करने योग्य नहीं होते उन्हें सोचाए कहते हैं भीष्म ड्रोन आदि सदाचारी और परमार्थ …
संजय बोले इस तरह आंसू भर का तार नेत्रों से युक्त करुणा से घिरे हुए उसे शोक आतुर अर्जुन…
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