आठवें अध्याय में पुष्पा हरिद्वार धारण योग्य अंगार सहित वर्णन किया गया है उसका फल अभी ज…
जो वहां अभिव्यक्त अक्षर ऐसा कहा गया है इस अक्षर नाम अभ्यक्त भाव को परम श्रेष्ठ गति कहत…
हम इस एक अक्षर स्वरूप ब्रह्मा का अर्थात ब्रह्मा की स्वरूप का लक्ष्य करने वाले ओमकार का…
इसलिए तू हर समय मेरा स्मरण कर और शास्त्र ज्ञान अनुसार स्वधर्म रूप युद्ध भी कर इस प्रका…
थे ब्रह्म ततापी कुर्ता अर्थ इत्यादि वर्षों से पूर्व अध्ययन भगवान ने अर्जुन के लिए प्रा…
इच्छा और द्वेष इन दोनों से जो उत्पन्न होता है उसका नाम इच्छा द्वेष समाधि है उसकी प्राण…
मेरे द्वारा स्थिर की हुई उसे श्रद्धा से युक्त हुआ वह इस देवता के स्वरूप की सेवा पूजा क…
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