ज्ञान के समान पवित्र करने वाला शुद्ध करने वाला इस लोक में दूसरा कोई नहीं है कर्म योग य…
वह ज्ञान जिस विधि से प्राप्त होता है वह तू जान यानी सुन आचार्य के समीप जाकर भली भांति …
अन्य कितने ही अन्यथा हरि अर्थात जिसे आहार नृत्य किया हुआ है ऐसे परिणीति भोजन करने वाले…
जिस यज्ञ के द्वारा देवों का पूजन किया जाता है वह देव संबंधित यज्ञ है अन्य कितने ही योग…
जो बिना मांगे अपने आप मिले हुए पदार्थ से संतुष्ट हैं अर्थात इस में जिनके मां का यह भाव…
जिनका प्रारंभ किया जाता है उनका नाम समारंभ है इस दीपक विपरीत से संपूर्ण कर्मों का नाम …
जो कुछ किया जाए उसे चेष्टा मंत्र का नाम कर्म है उसे कर्मों में जो अकर्म देखा है अर्थात…
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