जिसकी आराधना करके स्वयं ब्रह्मा जी इस जगत के सृजन करता हुए भगवान विष्णु पालन करता हुए …
जो मनुष्य हम दोनों के संवाद रूप इस धर्म युक्त गीता ग्रंथ को पड़ेगा उसके द्वारा यह होगा…
वैसे ही यजमान का भी प्रधान होती स्वयं देने के कारण और दक्षिणा देने के कारण यह संदेह मु…
तो फिर इसमें आत्मभाव कैसे होता है मिथ्या प्रतीत से ही सब रहित आत्मा की सरित मानकर इसमे…
उनको मैं वह बुद्धि योग देता है जिससे वह मुझे प्राप्त हो जाते हैं इससे यह सिद्ध होता है…
जो पूर्व कृत पाप फल देने के लिए आकृति नहीं हुए उनका छाया नहीं हो सकता ऐसा प्रकरण है उस…
यासीन दांत ठीक नहीं क्योंकि नित्य कर्मों के न करने से प्रत्यक्ष भाव होता है और मोक्ष व…
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