वे अविवेकी मनुष्य शरीर में स्थित इंद्र आदि कर्म से रूप में पर्याप्त भूत समुदाय को और श…
राम शास्त्र प्राण के इस भागवत वाक्य से जिसको प्रश्न बीच मिलता है वह अर्जुन बोले जो कोई…
अहंकार हम हम करने का नाम अहंकार है इसके द्वारा अपने आरोपित किए हुए विद्यमान और आदित्य …
जिसकी दक्षता न जानी जा सकती ऐसे प्रेम अपार प्रलय तक मरंपर यंत्र रहने वाले चिंता के आश्…
इस संसार में मनुष्य की दो सृष्टि है जिसकी रचना की जाए वह सृष्टि है आता देवी संपत्ति और…
नवे अध्याय में प्राणियों की देवी आसुरी और राक्षसी यह तीन प्रकार की प्रवृत्तियां बतलाई …
उत्तम अतिशय्याम उत्कृष्ट पुरुष तो अन्य ही है अर्थात इन दोनों से अध्ययन विलक्षण है जो क…
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