नन्दी को भगवान शिव का वरदान कैलाश पर्वत पर देवता गंधर्व महर्षि गान देव पटिया तथा कीनन …
एक समय की बात है मंत्र आंचल पर्वत पर सभी देवगन तथा भगवान विष्णु की उपस्थिति में महर्षि…
जिसकी आराधना करके स्वयं ब्रह्मा जी इस जगत के सृजन करता हुए भगवान विष्णु पालन करता हुए …
जो मनुष्य हम दोनों के संवाद रूप इस धर्म युक्त गीता ग्रंथ को पड़ेगा उसके द्वारा यह होगा…
वैसे ही यजमान का भी प्रधान होती स्वयं देने के कारण और दक्षिणा देने के कारण यह संदेह मु…
तो फिर इसमें आत्मभाव कैसे होता है मिथ्या प्रतीत से ही सब रहित आत्मा की सरित मानकर इसमे…
उनको मैं वह बुद्धि योग देता है जिससे वह मुझे प्राप्त हो जाते हैं इससे यह सिद्ध होता है…
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