जो बिना मांगे अपने आप मिले हुए पदार्थ से संतुष्ट हैं अर्थात इस में जिनके मां का यह भाव…
जिनका प्रारंभ किया जाता है उनका नाम समारंभ है इस दीपक विपरीत से संपूर्ण कर्मों का नाम …
जो कुछ किया जाए उसे चेष्टा मंत्र का नाम कर्म है उसे कर्मों में जो अकर्म देखा है अर्थात…
ऐसा समझ कर ही पूर्व कल के पुरुषों ने भी कर्म किए थे इसलिए तू भी कर्म ही कर तेरे लिए चु…
कर्मों की सिद्धि चाहने वाले अर्थात फल प्राप्ति की कामना करने वाले मनुष्य ही श्लोक में …
हे भारत वन आश्रम आदि इसके लक्षण है एवं प्राणियों की उन्नति और परम कल्याण का जो साधन है…
कर्मयोग जिसका उपाय है ऐसा जो यह सन्यास सहित ज्ञान निष्ठा रूप योग पूर्व के दो अध्याय मे…
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