तो फिर इसमें आत्मभाव कैसे होता है मिथ्या प्रतीत से ही सब रहित आत्मा की सरित मानकर इसमे…
उनको मैं वह बुद्धि योग देता है जिससे वह मुझे प्राप्त हो जाते हैं इससे यह सिद्ध होता है…
जो पूर्व कृत पाप फल देने के लिए आकृति नहीं हुए उनका छाया नहीं हो सकता ऐसा प्रकरण है उस…
यासीन दांत ठीक नहीं क्योंकि नित्य कर्मों के न करने से प्रत्यक्ष भाव होता है और मोक्ष व…
समस्त धर्म को अर्थात जितने भी धर्म है उन सबको यह नेता कर्म कर्म भाव का प्रतिपादन करना …
जो तू अहंकार का आश्रय लेकर या मान रहा है ऐसा विषय कर रहा है कि मैं युद्ध नहीं करूंगा स…
भक्ति से मैं जितना हूं और क्यों है उसको तत्व से जान देख लेता हूं अभिप्राय यह है कि मैं…
Social Plugin