योगदान और तप के तीन प्रकार के कर्म त्यागने योग्य नहीं है अर्थात इन तीनों का त्याग करना…
कितने ही संख्या थी मत अवलमनी पंडित जान कहते हैं कि जिसमें दोस्त हुआ दोस्त व्रत है वह क…
इस अध्याय में समस्त गीता शास्त्र का आश्रय और वेदों का संपूर्ण तात्पर इकट्ठा करके कहना …
मां का प्रसाद अर्थात मन की परम शांति स्वच्छता संपादन कर लेना सभ्यता जिसको सुमन सट्टा क…
वे अविवेकी मनुष्य शरीर में स्थित इंद्र आदि कर्म से रूप में पर्याप्त भूत समुदाय को और श…
राम शास्त्र प्राण के इस भागवत वाक्य से जिसको प्रश्न बीच मिलता है वह अर्जुन बोले जो कोई…
अहंकार हम हम करने का नाम अहंकार है इसके द्वारा अपने आरोपित किए हुए विद्यमान और आदित्य …
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