घोड़े में बेकार रूप सात्विक राजस और तमाशा इन तीनों भावों से अर्थात उपयुक्त राग द्वेष औ…
मुझ परमेश्वर से भारत अतिरिक्त जगत का कारण अन्य कुछ भी नहीं है अर्थात माही जगत का एकमात…
इस लोग द्वारा छठे अध्याय के अंत में प्रार्थना की बीच की स्थापना करके फिर स्वयं ही ऐसा …
योग मार्ग में लगा हुआ योगपष्ट सन्यासी पूर्ण कम करने वाले के अर्थात हाथों में आदि यज्ञ …
हे मा बहू मन चंचल और कठिनता से वास में होने वाले हैं इससे कोई संदेह नहीं किंतु अभ्यास …
एक तत्व भाव में स्थित हुआ जो पूर्व संपूर्ण भूतों में स्थित मूंछ वासुदेव को बचता है इस …
इस स्वाभाविक 200 के कारण जो अंत चंचल है तथा इसलिए जो अस्थिर है ऐसा मन जिस जिस शब्द आदि…
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