जो पूर्व कृत पाप फल देने के लिए आकृति नहीं हुए उनका छाया नहीं हो सकता ऐसा प्रकरण है उस…
यासीन दांत ठीक नहीं क्योंकि नित्य कर्मों के न करने से प्रत्यक्ष भाव होता है और मोक्ष व…
समस्त धर्म को अर्थात जितने भी धर्म है उन सबको यह नेता कर्म कर्म भाव का प्रतिपादन करना …
जो तू अहंकार का आश्रय लेकर या मान रहा है ऐसा विषय कर रहा है कि मैं युद्ध नहीं करूंगा स…
भक्ति से मैं जितना हूं और क्यों है उसको तत्व से जान देख लेता हूं अभिप्राय यह है कि मैं…
विशुद्ध कपट रहित निश्चय आत्मिक बुद्धि से संपन्न पुरुष धैर्य से कार्य कारण के संघट रूप …
इंडियन विषयकर होता है परंतु आत्मा ना तो कहीं भी विषय माना जाता है और ना जाकर वहां ही ह…
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