जिसकी दक्षता न जानी जा सकती ऐसे प्रेम अपार प्रलय तक मरंपर यंत्र रहने वाले चिंता के आश्…
इस संसार में मनुष्य की दो सृष्टि है जिसकी रचना की जाए वह सृष्टि है आता देवी संपत्ति और…
नवे अध्याय में प्राणियों की देवी आसुरी और राक्षसी यह तीन प्रकार की प्रवृत्तियां बतलाई …
उत्तम अतिशय्याम उत्कृष्ट पुरुष तो अन्य ही है अर्थात इन दोनों से अध्ययन विलक्षण है जो क…
मैं पृथ्वी में प्रविष्ट होकर अपने उसे बोल से जो की कामना और शक्ति से रहित मेरा ऐश्वर्य…
उत्कृष्ट आक्रमण करते हुए अर्थात पहले प्राप्त किए शरीर को छोड़कर जाते हुए तथा शरीर में …
इसका स्वरूप जैसा यह वर्णन किया गया है वैसा उपलब्ध नहीं होता क्योंकि यह स्वप्रभ की वस्त…
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