ओम नमो भगवते वासुदेवाय संक्षिप्त ब्रह्म पुराण नेवी से प्राणायाम सूद जी का आगमन पुराण का आरंभ तथा सृष्टि का वर्णन यश नीतीश शाह अस्मित प्रसिद्ध माया जंग जाते अस्मितम यदि चिंतामते कल्पना सरधुवा मोना विजेताम मोक्षम ध्रुवम चावंडे पुरुषोत्तम व्याख्या तब नित्यम विभव विश्नीश नाम क्या धन निशा मुदिता समाधि स्वाध्याय विश्व अध्ययन नित्यानंद में प्रसन्न मंगलम सर्वत्र निर्गुण व्यक्त कथन परिवर्तन धन का अपना विभव का संसार विदेश ना से हेतु मंजारने वन देने हरि मुक्त दम पूर्व कल की बात है परम पूर्णिमा में पवित्र नेविस ना क्षेत्र बड़ा मनोहर जान पड़ा था वहां बहुत से मुनि एकत्र हुए थे भांति-भांति के पुष्प उसे स्थान की शोभा बढ़ा रहे थे पीपल पारिजात चंदन अगर गुलाब तथा चंपा आदि अन्य बहुत से वृक्ष उसकी शोभा वृद्धि में सहायक हो रही थी भांति भांति के पक्षी नाना प्रकार के मृदाओं का झुंड अनेक पवित्र जलाशय तथा बहुत सी बलिया उन वनों को विभूषित कर रही थी ब्राह्मण छतरी वैश्य शूद्र रहता था अन्य जाति के लोग भी वहां उपस्थित थे ब्रह्मचारी गृहस्थ वानप्रस्थ और संन्यासी सभी जुटे हुए थे झूठ की झूठ गई है उन वनों की शोभा बढ़ा रही थी नेवी सारणी वाशी मनिका दशक वाशी 12 वर्ष तक चालू रहने वाला यज्ञ आरंभ था जो गेहूं चना उड़द मूंग और तिल हाथी पवित्र मित्रों से यज्ञ मंडल सुशोभित था वहां हम कुंड में आखिरी देव प्रज्वलित था और आहुतियां डाली जा रही थी उन महायज्ञ में सम्मिलित होने के लिए बहुत से मुनि और ब्राह्मण अन्य स्थानों से आया स्थानीय महर्षि भजन उन सब का यथा योग्य सत्कार किया ऋषि जीत सहित सब लोग जब आराम से बैठ गए तब परम बुद्धिमान लोग हरण सूट की वहां पधारे उन्हें देखकर मुनीवारों को बड़ी प्रसन्नता हुई उन सब ने सबका आधार किया था सत्कार किया सूची उनके प्रत्येक आधार का भाव प्रकट करके एक श्रेष्ठ आसन पर विराजमान हुए उसे समय सब ब्राह्मण सूजी के साथ वार्तालाप करने लगे बातचीत में अंत में सबने व्यास शिष्य लोग हरिणी जी से अपना संदेश पूछा मनी बोले साधु शिरोमणि आप पुराण तंत्र छाया शास्त्र इतिहास तथा देवताओं और व्यक्तियों की जन्म कर्म एवं चरित्र सब जानते हैं वेद शास्त्र पुराण महाभारत तथा मुख्य शास्त्र में कोई भी बात ऐसी नहीं है जो आपको ज्ञात न हो महामती आप सर्वस्त्र है अतः हम आपसे कुछ प्रश्नों का उत्तर सुनना चाहते हैं बताइए यह समस्त अग्रता कैसे उत्पन्न हुआ भविष्य में इसकी क्या दशा होगी स्थान और जड़ मरूप संसार सृष्टि से पहले कहां ली था और फिर कहां लाइन होगा लोग हर्ष वाणी जी ने कहा जो निराकार शुद्ध नित्य परमानंद सदा एक रूप और सर्व बिजी अब उसका भगवान विष्णु को नमस्कार है जो ब्रह्मा विष्णु वासुदेव जागृत उत्पत्ति पालन एवं संघार करने वाले तथा जो भक्तों को संसार के सागर से उतरने वाले उन भगवान को प्रणाम है जो एक होकर भी अनेक रूप धारण करते हैं स्थल और सच में सब जिनके ही स्वरुप है जो अव्यक्त कारण योजक कार्य रूप तथा मोक्ष के हेतु उन भगवान विष्णु को नमस्कार किया उसकी जागृत उत्पन्न पालन और संघर्ष करने वाले हैं जरा और मृत्यु जिसका स्पर्श नहीं करती जो उसके मूल कारण है उन परमात्मा विष्णु को नमस्कार है जो इस विश्व के आधार है अत्यंत सुषमा से महसूस मास प्राणियों के भीतर विराजमान है चार और आचार पुरुष से उत्तम तथा अविनाशी है उसे भगवान विष्णु को प्रणाम करता हूं जो वास्तव में अत्यंत निर्मल ज्ञान स्वरूप है किंतु आज्ञा वासना पदार्थों के रूप में प्रतीत हो रहे हैं जो भी स्वीकृतियां सृष्टि और पालन में समस्त एवं उसका संघार करने वाले हैं सर्वस्त्र जगत की अधिश्वर है जिनके जन्म और निराश होते नहीं तो आप भी आए यदि अत्यंत शोष्मिया था सिद्धेश्वर है उन श्री हरि को तथा ब्रह्मा आदि देवताओं को मैं प्रणाम करता हूं तत्पश्चात की थी खास पुराण के ज्ञाता वेद वेदांतों के प्रसारण विद्वान संपूर्ण शास्त्रों के तथ्य परासमन भगवान व्यास का को जो मेरे गुरुदेव हैं प्रणाम करके मैं वेदों के तुल्य मानवीय पुराने का वर्णन करता करूंगा पूर्व काल में दक्ष आदि श्रेष्ठ मुनियों के पूछने पर कमल यानी भगवान ब्रह्मा जी ने जो सुनाई थी वही पाप नाचे कथा में इस समय कहूंगा मेरी वह कथा बहुत ही विचित्र और अनेक अर्थ वाली होगी उनके स्तुति के अर्थ का विस्तार होगा जो इस कथा को सदा अपने हृदय में धारण करेगा तथा निरंतर सुनेगा वह अपनी आवाज परंपराओं को कायम रखते हुए स्वर्ग लोक में प्रतिष्ठित होगा जो नित्य सदा सत्य स्वरूप तथा कर्मभूत वत प्रतीत है उसी को प्रधान कहते हैं उसी से पुराने इस विश्व का निर्माण किया है म्युनिवरों अमित तेजस्वी ब्रह्मा जीवन ही पुरुष समझो हुए समस्त प्राणियों की सृष्टि करने वाले तथा भगवान नारायण की आश्रित हैं प्राकृतिक से महत्व महत्व से आधार तथा आधार से अफसोस में भूत भूत उत्पन्न हुए भूतों के जो भेद हैं वह भी उन सूचना भूतों से ही प्रकट हुए हैं यह सनातन सा वर्ग है तब अंतर इस स्वरूप भगवान नारायण ने नाना प्रकार की प्रजा उत्पन्न करने की इच्छा से सबसे पहले जल की की ही सृष्टि की फिर जाल में अपनी शक्ति का आदान किया जल का दूसरा नाम न है क्योंकि उसकी उत्पत्ति भगवान न से हुई है वह जल पूर्व काल में भगवान का ध्यान निवास स्थान हुआ इसलिए वह नारायण कहलाते हैं भगवान ने जो जल में अपनी शक्ति का ध्यान किया उसे एक बहुत विशाल सुहानी में फंड प्रकट हुआ उसी में इस नवु ब्रह्मा जी उत्पन्न हुए ऐसा सुना जाता है सुवर्ण के समान कार्तिक महान भगवान ब्रह्मा ने एक वर्णिक पोषण में निवास करके उनके दो टुकड़े कर दिए फिर एक टुकड़े से भूलोक बना और दूसरे टुकड़ों से भूलो उन दोनों के बीच में आकाश रखा जल के ऊपर तैरती हुई पृथ्वी को स्थापित किया फिर दसों दिशाएं निश्चित किया साथ ही कल मां वाणी काम क्रोध और रिति का सृष्टि इन भावों के अनुरूप सृष्टि करने की इच्छा से ब्रह्मा जी ने साथ प्रजातियां को अपने मन में उत्पन्न किया उनके नाम इस प्रकार हैं अमरजीत अतिरिक्त अनित पुरस्व पुरुषवाकृत तथा वशिष्ठ पुराणों में हिसार ब्रह्मा निश्चित किए गए हैं तत्पश्चात ब्रह्मा जी ने अपने रोग से रुद्रो को प्रकट किया फिर पूर्व जन्म में पूर्वज संत कुमार कुमार जी को उत्पन्न किया है इन्हें साथ महर्षियों से समस्त प्रजा तथा 11 रुद्रो का पूर्ण हुआ उक्त 7 महर्षियों के साथ बड़े-बड़े दिव्य वर्ष है देवता भी नहीं के अंतर्गत है उक्त सातों वर्षों के लोग कर्मनि निशीथ एवं शांतनु होना है उन वंशों को बड़े-बड़े ऋषियों ने सुशोभित किया इसके बाद ब्रह्मा जी ने विद्युत वराजरा में रोहित इंद्रधनुष पक्षी तथा मेघना की सृष्टि की फिर योगो की सिद्धि के लिए उन्होंने ऋग्वेद युग में तथा सामवेद प्रगति कीयता दाताराम शाम देवताओं की उत्पत्ति बताई जाती है छोटे बड़े सभी भूत भगवान ब्रह्मा के अंगों से उत्पन्न हुए इस प्रकार प्रजा की सृष्टि करते रहने पर भी जब प्रजा की वृद्धि नहीं हुई तब प्रजा अपने शरीर के दो भाग करके आद्र से पुरुष तथा आदर्श स्त्री हो गए पुरुष का नाम मोनू हुआ उन्हें के नाम पर मनोरंजन कल माना गया स्त्री मयोजन शतरूपा थी जो मनु की पवित्र रूप में प्राप्त हुआ उसने 10000 वर्षों तक अत्यंत दुखहर तपस्या करके परम तेजस्वी पुरुषों को पवित्र रूप से प्राप्त किया वहीं ही पुरुष इसनाओं मनु कह गए वह राज्य पुरुष भी उन्हीं का नाम है उनका मन्वंतरण कल 71 चतुर योगी बताया जाता है शतरूपा ने बैराज पुरुष के कौन से वीर प्रिया व्रत और उत्पाद नामक पुत्र उत्पन्न किया वीर से काम्या नमक श्रेष्ठ कन्या उत्पन्न हुई जो कदम प्रजाति धर्म पत्नी हुई क्यों काम्या में गर्व से चार पुत्र सम्राट को चित विराट और प्रभु प्रजापति अंतरिक्ष राजा उत्पन्न पाठ को गोद ले लिया प्रजापति उत्पन्न पद अपनी स्त्री सूरदास गर्व से दूरी कृतिमान आयुष तथा वस्तु से चार पुत्र उत्पन्न किया दोनों से उनकी स्त्री सुधारने सृष्टि और भाव इन दोनों पुत्रों से जन्म लिया सृष्टि ने उनकी पत्नी सुरक्षा गर्व से रिशु रिशु वीर किलियत परीक्षा से यह पांच पुत्र उत्पन्न हुए रिशु से भ्रांतिजा सोचा मैक से तेजस्वी पुत्रों को जन्म दिया जैसे उसकी उनके पत्नी पुरुष श्रेणी जो महात्मा प्रजापति विरानी कन्या थी जिस राहु मनोज उत्पन्न हुए चारूप मनु वाई राज्य प्रजापति की कन्या स्रोत गर्व से 10 महाबली पुत्र हुए उनके नाम इस प्रकार हैं उसका उत्तर शत्रुघ्न तथा दसवीं सहयोग कवि अष्टक अत्री रात शत्रुघ्न तथा वैष्णव पुरुषों से अग्निया स्थान या ना इस राहु इस राहु तथा मानव शिक्षा पुत्र उत्पन्न की आड़ से मुनि वेज नामक एक पुत्र पैदा किए हुए अनोखे अत्याचार से ऋषियों को बड़ा क्रोध हुआ अंत में प्रजावाणी रक्षा के लिए उन्होंने उनके दाहिने हाथ का मतदान किया उनके महाराज मृत्यु प्रकट हुई उन्हें देखकर मुनियों ने कहा यह मन तेजस्वी नवेश राजा को प्रसन्न रखेगी तथा महान यज्ञ के भावी होगा वेणु मोती मनुष्य ने कवच उदाहरण किए अदरक के मानव तेजस्वी से प्रकट हुए थे उन्होंने इस पृथ्वी का पालन किया राज सूर्य यज्ञ के लिए अभिषेक होने वाले राजाओं में से हुए सर्वप्रथम थी उन्हीं से ही स्तुति ज्ञान में निपुण सूत प्रावधान प्रकट हुआ उन्होंने इस पृथ्वी से सब प्रकार के आवाज़ दोगे प्रजा की जीविका चली इसी उद्देश्य से उन्होंने देवताओं ऋषियों पितरों दोनों गंधर्व तथा अप्सराओं आदि के साथ पृथ्वी का दोहन किया था
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Om Namo Bhagavate Vasudevay Brief Brahma Purana Pranayam from Nevis Arrival of Sood Ji Beginning of the Purana and description of the creation Yash Nitish Shah Asmit Prasiddh Maya Jung Jaate Asmitam Yadi Chintamate Kalpana Sardhuva Mona Vijaytam Moksham Dhruvam Chavande Purushottam Vyakhya Tab Nityam Vibhav Vishnish Naam Kya Dhan Nisha Mudita Samadhi Swadhyay Vishwa Adhyayan Nityananda Me Prasanna Mangalam Sarvatra Nirgun Vyakt Nari Parivartan Dhan Ka Apna Vibhav Ka Sansar Vibhav Vyas Na Se Muthaya Manjarne Van Dene Hari Mukt Dam It was yesterday in the Param Purnima, the sacred Nevis area looked very beautiful, many sages had gathered there, various types of flowers were enhancing the beauty of that place, Peepal, Parijat, Sandalwood, Agar, Rose and Champa etc. many other trees were helping in enhancing its beauty, various types of birds, flocks of various types of soils, many sacred water bodies and many Baliyas were adorning those forests, Brahmins, Chhatri, Vaishya, Shudra lived there, people of other castes were also present there Brahmacharis, householders, Vanaprasthas and Sanyasis were all gathered. The beauty of those forests was being enhanced. The Yagya of Nevi Sarni Vashi, Manika Dashak Vashi, which was to continue for 12 years, had begun. The Yagya Mandal was decorated with wheat, gram, urad, green gram and sesame, elephants and holy friends. The last deity was lit in the Ham Kund and offerings were being made. Many Munis and Brahmins came from other places to participate in that Maha Yagya. The local Maharishi Bhajan welcomed them all as per their wish. When everyone including Rishi Jeet sat comfortably, the most intelligent people of Haran Suit arrived there. The Munis were very happy to see them. They welcomed everyone and after expressing the feelings of each of their followers, they sat on a good seat. At that time, all the Brahmins started talking with Suji. At the end of the conversation, all the disciples of Vyas asked Harini ji about their message. Mani said, Sadhu Shiromani, you know the Puranas, Tantra, Chaya Shastra, history, birth, deeds and character of gods and people, Vedas, Shastra, Puranas, Mahabharata. And there is nothing in the main scriptures that is not known to you, Mahamati, you are the omnipresent, hence we want to hear answers to some questions from you. Tell us how all this precedence arose, what will be its condition in the future, where did the space and inanimate form of the world originate before its creation and where will the line be drawn again? Harsh Vani Ji said, who is formless, pure, eternal, blissful, always of one form and all-engrossed, now salutations to Lord Vishnu, who is Brahma, Vishnu, Vasudeva, the awakened, the creator, the nurturer and the destroyer, and who descends from the ocean of the world for the devotees, salutations to that Lord who, despite being one, takes many forms, the space and in reality, all are his forms, who is the unmanifested cause, the connecter, the effect form and for salvation, salutations to that Lord Vishnu, his awakened, the nurturer and the destroyer, who is not touched by old age and death, who is its root cause, salutations to that Supreme Lord Vishnu, who is the basis of this universe, is filled with utmost beauty, resides within all living beings, is superior to the four and conduct men and is indestructible, I salute him to Lord Vishnu, who is actually the form of pure knowledge, but appears in the form of objects of command and desire. Whatever acceptances are being made, he is the one who is all in the creation and sustenance and its destroyer, he is the lord of the entire universe, whose birth and despair are not there, then you too should come, he was extremely Shoshmiya, I bow to Shri Hari, the Siddheshwar, and to the gods like Brahma, after that I bow to the expert of Puranas, the scholar of Vedas, Vedanta, the propagator of facts of all scriptures, Lord Vyas who is my Gurudev, I will describe the human story equivalent to Vedas, what Kamal i.e. Lord Brahma ji had narrated in ancient times on the question of Daksha and other great sages, I will tell the same in the story of sin, this time my story will be very strange and of many meanings, the meaning of his praise will be expanded, whoever will keep this story in his heart and will listen to it continuously, he will be established in the heaven by maintaining his voice traditions, whoever always appears to be the true form and the karmabhoomi, he is called Pradhan, from him this old world has been created, Munivars, the infinitely bright Brahma, life itself is considered to be the man, the creator of all living beings and is dependent on Lord Narayana, is natural From importance, from importance, base and from base, from regret, ghosts were born. The distinctions of ghosts have also appeared from those information ghosts, this is an eternal category, then in this form, Lord Narayana, with the desire to create various types of people, first created water, then exchanged his power in water. The other name of water is water because it originated from Lord Narayana. That water was the place of meditation of God in ancient times, hence he is called Narayana. When God meditated on his power in water, a huge pond appeared in it. In the same place, this new Brahma ji was born. It is heard that Kartik, the great Lord Brahma, residing in a colorful pond like gold, divided it into two pieces, then created the earth from one piece and the earth from the other piece. He placed the sky between them and established the earth floating on water, then determined the ten directions, along with the creation of mother speech, lust, anger and ritual. With the desire to create the universe according to these feelings, Brahma ji created seven species in his mind, their names are as follows: Amarjeet, apart from Anit, Purusha, Purusha, Vaakrita andHisar Brahma has been determined in Vashishtha Puranas. Thereafter Brahma Ji manifested Rudra from his disease, then in his previous birth he created ancestor saint Kumar Kumar Ji. Along with him, all the people and 11 Rudras were completed from the Maharishis. Along with the above 7 Maharishis, there are big divine years and even the gods are included. The people of the above seven years are Karmani Nishith and Shantanu. Those dynasties were adorned by big sages. After this, Brahma Ji created Rohit, rainbow bird and Meghna in Vidyut Varajra. Then for the accomplishment of Yoga, he progressed in the Rigveda era and Samveda. The origin of the gods Dataram Sham is said to be all the small and big ghosts were born from the body parts of Lord Brahma. In this way, even after creating the people, when the people did not increase, then the people divided their body into two parts from Adra to man and ideal woman. The name of the man was Manu. The name of the man was considered to be Manoranjan Kal after him. The woman was Mayojan Shatarupa, who was received in the pure form of Manu. He By doing extremely painful penance for 10000 years, he got the most brilliant men in a pure manner, the same man was called Isnao Manu, that Rajya Purush is also his name, his Manvantaran is said to be 71 clever yogi, Shatarupa gave birth to a son named Veer Priya Vrat and Utpadan from Barraj Purush, from Veer a best girl named Kamya was born who became the wife of Kadam species Dharma, why from Kamya four sons were born, Emperor Chit Virat and Prabhu Prajapati Antriksh Raja was born, Prajapati was born Pad his wife Surdas from Garv, Distance Kritiman Ayush and Vastu four sons were born from both of them, their wives were improved, Srishti and Bhaav were born from these two sons, Srishti was born from his wife Suraksha from Garv, Rishu Rishu Veer Kiliyat Pariksha these five sons were born from Rishu, Bhrantija Socha Mac gave birth to brilliant sons like his wife Purush Category who was the daughter of Mahatma Prajapati Virani from whom Rahu Manoj was born, Charup Manu and Rajya Prajapati's daughter Source Garv had 10 mighty sons, their names are as follows, its answer is Shatrughan and tenth Sahyog Kavi Ashtak Atri night Shatrughna and Vaishnav men from Agnia Sthan or Na is Rahu is Rahu and human education son was born, sage Veg was born with a unique atrocity, the sages were very angry with this, in the end for the protection of people's voice they voted for his right hand, their king Mrityu appeared on seeing him, sages said that this mind-bright Navesh will keep the king happy and will be the future of the great yajna, Venu Moti man made armor example of ginger, human being was born with brilliance, he ruled this earth, he was the first among the kings to be anointed for Raj Surya yajna, from him Sut Prabandhan appeared, proficient in the knowledge of praise, he gave birth to all kinds of voices from this earth, for this purpose the livelihood of the people was run, he exploited the earth with the help of gods, sages, ancestors, both Gandharvas and Apsaras etc.
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