ब्रह्म पुराण अध्याय 3

14 मनोवांतरणों तथा विश्वसनीय शक्ति का वर्णन



ऋषि बोले महामती सूत्र जी आप समस्त मन्वंत्रण का विस्तार पूर्वक वर्णन कीजिए तथा उसकी प्राथमिक सृष्टि भी बताइए लोग हरण सुनने कहा 20 रंगत समस्त मन्वंत्रणों का विस्तार वर्णन तो 100 वर्षों में ही नहीं हो सकता अतः संक्षेप में ही सुनो प्रथम इस नाबू मनु है दूसरे इस नाबूजी तीसरे उत्तम चौथ तमाशा पांच में रेवत छठ में जासूस तथा साथ में विश्वास मनु कहते हैं वे स्वस्थ मनाही वर्तमान कप के मुनि है इसके बाद सात्विक भौतिक रोचक तथा चार मेरा आमंत्रण नाम के मानो होंगे बहुत वर्तमान और भविष्य के सब मिलकर 14 मनु है मैं जैसा सुना है उसके अनुसार सब मनुओं के नाम बताएं आप उनके समय में होने वाली विषयों मुनि पुत्रों तथा देवताओं का वर्णन करो मानचित्र यात्री आश्रित फुलवा फरीदपुर हुआ तथा वशिष्ठ के साथ ब्रह्मा जी के पुत्र उत्तर दिशा में स्थित है जो इस महबूब मनोरंजन की शक्ति एग्री हेतु अग्रबाहु मठ से मध्य तिथि वासु ज्योतिष मां अमृत मान अब संभल और पुत्र ही शब्दार्थ इस नाबू मनु के महाबली पुत्र थे इना को यह प्रथम मन्वंतरण बतलाया गया है इस भाव मन्वंतरण प्राण बृहस्पति दक्षित अत्री चौक वायु प्रकरण का महामृत्य के साथ सात्विक है तो उदित नामदेव देवता थे और आवृत्ति संस्कृति ज्योति आप मूर्ति प्रतीत नाराभोग माप तथा ऊर्जा है महात्मा की शुरुआत जीत मनु के पुत्र बताए गए जो मनुष्य बलवान और पराक्रमी थी यह तृतीय मनमंत्रण का वर्णन हुआ अब तीसरा मन्वंतरण बतलाया जाता है सुनो वशिष्ठ के साथ पुत्र वशिष्ठ तथा हिरण गर्व की तेजस्वी पुत्र ऊर्जा यह उत्तम मन्वंत्रण के ऋषि थे ही सूरज तनु वर्ष मधु माधव सूचित शुक्ला सहस्त्रनाम हो तथा नाम एवं उत्तम मनु के पराक्रमी पुत्र थे इन मनुवातारण में मनु नाम वाले देवता थे इस प्रकार तीसरा मनमंत्रण बताया गया है अब चौथ का हुआ वर्णन करता हूं काव्य पृथ्वी एग्री बहू डाटा कॉपी वहां और आकैवन के साथ उसे समय के सात्विक थे सत्य नाम वाले देवता थे वृद्धि तपस्या सुपुत्र बहुत सांत्वना तापूर्ति अल्प क्रांति धनी और पारंगत के 10 नाम से और मनु के पुत्र कह गए हैं यह चौथा मन्वंतरण का वर्णन हुआ 5 में रेवत मनुवातारण है उसके देव बहू प्रभु वेद शिरा हीरो मैन प्रजा सोमनंदन पुत्र बहू तथा अत्री कुमार सात नेत्र एवं सप्तऋषि थे अद्भुत रात और प्राकृतिक नाम वाले देवता द ग्रेट मैन अभी आप युक्त तट पर देसी निर्गुण आरंग प्रकाश नाइन सत्याग्रह अमृत यह रितु मनु के पुत्र थे या पांचवा मन्वंतरण बताया गया है तब छठ में इच्छा कस मन्वंतरण का वर्णन करता हूं सुनो उसमें ब्रिंग नव गिरीश सुविधा हरिद्वार दिए सप्त ऋषि थे लेक नाम वाले पंच देवता द नरवालेट नाम से प्रसिद्ध रूप आदि का सुख मनु के 10 पुत्र बताए जाते हैं यहां तक की छठवें मन्वंतरण का वर्णन हुआ है आप सब तभी सूट मन्वंतरण वर्णन सुनो अत्री वशिष्ठ कश्यप गौतम भारद्वाज विश्वामित्र अति जमदृग के इस वर्तमान मनोरंजन में सप्त ऋषि होकर आकाश में विराजमान है शब्द रसीद दृश्य सेठ वसुंधरा नहाती और वास्तविक कुमार के इस वर्तमान मनुवातारण के देवता माने गए हैं वैश्विक मनु की इस राहु का आदि 10 पुत्र हुए ऊपर जिन मा तेजस्वी महर्षियों के नाम बताए गए उन्हें के पुत्र और पुत्र आदि संपूर्ण दिशाओं में फैले हुए हैं प्रत्येक मनुवातारण में धार्मिक व्यवस्था तथा लोक राक्षस के लिए 7 सप्त ऋषि रहते हैं मनोरंजन बीतने के बाद उनमें चार महर्षि अपना कार्य पूरा करके रोग शोक से रहित ब्रह्म लोक में चले जाते हैं तपस्वी दूसरे कर तप इस प्रकार के उसकी पूर्ति करते हैं भूत और वर्तमान काल के शब्द ऋषि क्रम में होते आए हैं सब तेरे सुमंत्रण होने वाले शब्द ऋषि से परशुराम व्यास अतिरिक्त भारद्वाज स्कूल में उत्पन्न द्रोणा फुल अस्थमा गौतम मुंशी सारदात कुशालपुर में उत्पन्न करो तथा कश्यप नाम और बेरिंग हार्दिक वंशांत्रिक वासु वशिष्ठित वायु तथा सुमित ए भविष्य में सब थोड़ी मनु पुत्र होंगे प्रातः काल उठकर इनका नाम लेने से मनुष्य सुखी यह सोच भी तथा दीर्घायु होता है भविष्य में होने वाली अन्य मनुवंत्रण का संक्षेप से वर्णन किया जाता है सुनो श्रवण नाम के पांच मनु होंगे उसमें से एक तो सूर्य के पुत्र और शेष चार प्रजापति के के चार मेर गिरी के शिखर पर भारी तपस्या करने के कारण मेर सरवत के नाम से विख्यात होंगे यह दक्ष के देवता प्रिया के पुत्र हैं इन पांच मनुओं की अतिरिक्त भविष्य में रोज कर बहुत नाम के दो मनु और होंगे प्रजापति रुचि के पुत्र रोचक कह गए हैं और रुचि के दूसरे पुत्र जो भूत के घरों से उत्पन्न होंगे और बहुत मनुष्य कहलाएंगे इन कल्पन में होने वाले साथ मनाविक है इन सब के द्वारा दीपों एवं नगरों सहित संपूर्ण पृथ्वी का एक सहस्त्र भूटान पालन होता है सत्य युग से त्रेता तथा आदि चारों योग 71 बार पीटकर जब कुछ अधिक कल से हो जाए तब वह एक मनोरंजन कहलाता है इस प्रकार से 14 मनु बताए गए हैं यह आशिक वृद्धि करने वाले हैं समस्त वेदों और पुराणों में इनका प्रभुत्व वर्णित है यह प्राजों के पलक इनके या इसका कीर्तियां श्रेष्ठ सरकार है मनुवातारण में कितने ही संघर्ष होते हैं और संसार के बाद कितने ही सृष्टि होते रहते हैं इन सब का पूरा-पूरा वर्णन से 100 वर्षों में नहीं हो सकता है मन्वंतरण के बाद जो संघार होता है उसमें तपस्या ब्रह्मचारी तो शास्त्र ज्ञान से संपन्न कुछ देवता और सप्तऋषि शेष रह जाते हैं 1000 चतुर्भुज पूर्ण होने पर कप समाप्त हो जाता है उसे समय सूर्य की प्रचंड करने से समस्त प्राणी दक्ष हो जाते हैं तब सब देवता आदि गानों के साथ ब्रह्मा जी को आगे करके सूर्य श्रेष्ठ भगवान नारायण में लीन हो जाते हैं वह भगवान ही कप के अंत में पुनः भूतों की सृष्टि करते हैं एवं अभ्यास सनातन देवता है यह संपूर्ण जगत उन्हीं का है मुनिवारों में आप हमारे सामान वर्तमान महा तेजस्वी वे स्वास्थ्य मनीष सृष्टि का वर्णन करूंगा महर्षि कश्यप से उनकी वर्षा दर्ज कन्या आदि अदिति के गर्भ से विश्वास सूर्य का जन्म हुआ विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा बिनवाक की पुत्री हुई उसके गर्भ से सूर्य से तीन संताने उत्पन्न की जिनमें एक कन्या और दो पुत्र थे वह सबसे पहले प्रजापति श्रद्धा इन्हें देशभक्त मुनि रहते हैं उत्पन्न हुई तत्पश्चात या मोरी यमुना से जुड़ी संताने हुई भगवान सूर्य के तेजस्वी स्वरूप को देखकर संज्ञा उन्हें या नशा कि उसे उसने अपने ही समान वर्ण वाली अपनी छाया प्रकट की वह छाया संज्ञा अथवा उत्सवहन नाम से विख्यात हुई उनको भी संज्ञा में समझकर सूर्य ने उसके गर्भ से अपने ही समान तेजस्वी पुत्र का उत्पन्न किया हुआ आपने बड़े भाई मनु के ही समान था इसलिए संवाद मुनि के नाम से प्रसिद्ध हुआ छाया संज्ञा से जो दूसरा पुत्र हुआ उसके अनुसार के नाम से प्रसिद्ध हुआ यह धर्मराज की पद पर प्रतिशत हुआ और उन्होंने समस्त प्रजाप को धर्म से संतुष्ट किया इस शुभ कर्मों के कारण उनके पितरों का अधिपति और लोग पलक पद का प्राप्त हुआ संवाद मुनि प्रजापति वाले सब वक्त मनोरंजन के हुए ही स्वामी होंगे हुए आज भी नेहरू गिरी के शिखर पर नित्य तपस्या करके उनके भाई शनिचर से ग्रह की पदवी पाई

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Description of the 14 Manavtantras and the Power of Reliable Manavtantra

The sage said, "Mahamati Sutra, please describe the entire Manavtantra in detail and also explain its primary creation." People listened to the 20 Rangat. A detailed description of all the Manavtantras cannot be completed in 100 years, so listen briefly. First, there is Nabu Manu. Second, there is Nabuji. Third, there is Uttam, fourth, Tamasha, fifth, Revat, Chattha, and along with him, there is Vishwas Manu. He is said to be a sage of the healthy, forbidding, present, then Satvik, material, interesting, and four named Mera, invitation, as if they are very present and future. Together, there are 14 Manus. According to what I have heard, please name all the Manus. Describe the subjects, sages, sons, and gods that existed during their time. Map traveler dependent Phulwa was born in Faridpur and along with Vashishtha, the son of Brahma ji is located in the north, which is the power of this beloved entertainment. For Agri, from Agrabahu Math, the middle date, Vasu, Astrology, Mother Amrit Maan, now be careful, and the son is the meaning of the word. This Nabu Manu had a mighty son. This is said to be the first Manvantaran. In this Bhaav Manvantaran, Prana, Brihaspati, Dakshit, Atri, Chowk, Vayu Prakaran, with Mahamritya, is Satvik, then Udit Namdev was the deity and repetition is culture, light, you are idol, Pratik, Narabhog, measurement and energy, the beginning of Mahatma, victory was said to be the son of Manu, who was a strong and powerful man, this is the description of the third Manvantaran. Now the third Manvantaran is said to be listen, along with Vashishtha, son Vashishtha and Hiran, the bright son energy of Garv, these were the sages of the best Manvantaran, Surya, Tanu, Varsha, Madhu, Madhav, Sushit Shukla, Sahasranam, and name and Uttam were the powerful sons of Manu, in these Manuvataran there were deities named Manu, in this way the third Manvantaran is said to be, now I am describing the fourth, poetry, Prithvi, Agri, Bahu, data copy, there and with Akaivana, he was Satvik of the time, there were deities named Satya, Vriddhi, Tapasya, Suputra, lot of consolation, Taappurti, Alp, Kranti, Dhan and Parangat, with 10 names and the sons of Manu were said to be This is the fourth Manvantarana described. In the fifth, there is Revat Manuvatarana, its gods, daughter-in-law, Lord Veda Shira, Hero Man, subjects, Somanandan, son, daughter-in-law and Atri Kumar, seven eyes and Saptarishis were there, the gods with the name of Adbhuta Ratri and Prakriti, the Great Man, right now you are on the right bank, Desi Nirgun Arang Prakash Nine Satyagraha Amrit, these were the sons of Ritu Manu or it has been described as the fifth Manvantarana, then in the sixth, I will describe Ichchha Kas Manvantarana, listen, in it, there were Sapta Rishis given Bring Nav Girish Suvidha Haridwar, the five gods named Lek, the famous form known as Narvalet, the happiness of etc., Manu's 10 sons are said to be there, even the sixth Manvantarana has been described, you all, only then listen to the description of Suit Manvantarana, in this present recreation of Atri, Vashishtha, Kashyap, Gautam Bharadwaj, Vishwamitra, Ati Jamdrug, are seated in the sky as Sapta Rishis, words, receipt, scene, Seth, Vasundhara bathing and the actual Kumar are considered to be the gods of this present Manuvatarana. This Rahu of the universal Manu had ten sons, whose names have been mentioned above, their sons and daughters etc. are spread in all directions. In every Manuavataran, there are seven Sapta Rishis for the religious system and the world demons. After the entertainment is over, four of them complete their work and go to Brahmalok, free from disease and sorrow. Ascetics and others fulfill their penance in this way. The words of the past and present have been in the Rishi order. All the words that are your Sumantra are from the Rishi. Apart from Parashuram Vyas, Bharadwaj was born in the school. Drona Phool Asthma Gautam Munshi Saradat was born in Kushalpur and Kashyap named and Bering Hardik hereditary Vasu Vashishtit Vayu and Sumit. In the future, all the sons of Manu will be Manu. By waking up in the morning and taking their names, a person will be happy, this thought also gives him longevity. Other Manuavatarans to be born in the future are described briefly. Listen, there will be five Manus named Shravan, one of them will be the son of Surya. And the remaining four of the four Prajapatis will be famous by the name of Mer Sarvat due to doing heavy penance on the peak of Mer Giri. They are the sons of Priya, the god of Daksha. Apart from these five Manus, in the future there will be two more Manus with the name Rojkar Bahut. The son of Prajapati Ruchi is called Rochak and the other son of Ruchi who will be born from the houses of ghosts and will be called Bahut Manushya. The companions in these Kalpana are Manavik. One thousand Bhutans of the entire earth including the lamps and cities are maintained by all of them. When some more Kalpa is formed after beating the four Yogas from Satya Yuga to Treta and etc. 71 times, then it is called Ek Manavran. In this way 14 Manus have been described. They are the ones who increase the love. Their dominance is described in all the Vedas and Puranas. They are the guardians of the people. Their or its fame is the best government. There are so many conflicts in Manuvataran and so many creations keep happening after the world. The complete description of all these cannot be done in 100 years. In the destruction that happens after Manvantaran If the celibate performs penance, then some gods and Saptarishis, endowed with the knowledge of scriptures, remain. When 1000 Chaturbhujs are completed, the cup ends. At that time, by making the Sun fierce, all the creatures become skilled. Then, by putting Brahma ji in front, all the gods merge into the Sun, the best Lord Narayana, with songs. That God again creates the beings at the end of the cup and is the eternal deity. This entire world belongs to him. Among the sages, I will describe the present, great, bright, healthy and wise creation like us. From Maharishi Kashyap, from the womb of his Varsharaj daughter Adi Aditi, Vishwas Surya was born.Karma's daughter Sanjna was the daughter of Binvak, from her womb Surya gave birth to three children, one daughter and two sons. First of all Prajapati Shraddha was born, he is a patriotic sage, after that children were born from Ya Mori Yamuna, seeing the radiant form of Lord Surya, Sanjna revealed his shadow of the same color as his, that person became famous by the name of Chhaya Sanjna or Utsavhan, considering him also as Sanjna, Surya gave birth to a son as radiant as himself from her womb, he was similar to his elder brother Manu, hence became famous by the name of Samvad Muni, the second son born from Chhaya Sanjna became famous by the name of Anusar, he attained the position of Dharmaraj and he satisfied all the Prajapas with religion, due to these auspicious deeds he became the ruler of his ancestors and people got the position of Palak, Samvad Muni became the master of all the times for entertainment, even today by doing daily penance on the peak of Nehru Giri, he got the position of a planet from his brother Shanichar.

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