त्रिलोक के स्वामी प्रभु श्री कृष्ण जी ने देव गानों के छोड़ते हुए प्रत्येक अस्त्र-शस्त्…
हे थिस श्रेष्ठ उसे अनुमियत पारिजात वृक्ष को देखकर सद्भामा बहुत ही प्रसन्न हुई और प्रभु…
पारिजात हरण श्री पाराशर जी बोले पक्षी राज गरुड़ उसे वरुण छात्र मणि पर्वत और सद्भावना स…
नरकासुर का वध श्री पाराशर जी बोले हे मैथिली एक बार देवराज इंद्र अपने गजराज हाथी रावत …
रुक्मी का वध श्री पाराशर जी बोले है मैथिली रुक्मणी के प्रद्युमन के अतिरिक्त चारों वे…
प्रदुमन हरण तथा सब्र वध श्री मैथिली जी बोले हे भगवान कल के समय विकराल सावरा और ने यह …
रूक्मिणी हरण श्री पाराशर जी बोले विधवा देव अंतर्गत कुंदनपुर नाम नगर के भिक्षक नामक एक …
Social Plugin