तू समस्त क्षेत्र में प्रयुक्त लक्षणों से युक्त क्षेत्र यज्ञ भी मुझे अंसारी परमेश्वर को…
सातवें अध्याय में ईश्वर दो प्रकृतियां बतलाई गई है पहले आठ प्रकार के विभक्ति त्रिकोण आद…
तथा जो सदा ही संतुष्ट है अर्थात स्थिति के कारण स्वरूप पदार्थ की लाभ हानि में जिसके जो …
परंतु यदि तू ऐसा करने में भी अर्थात जैसा ऊपर कहा है उसे प्रकार मेरे लिए कम करने के पार…
उनको क्लेश अधिकतर होता है यद्यपि मेरे लिए ही कर्म आदि करने में लगे हुए साधकों को भी बह…
दूसरे अध्ययन से लेकर विभूति योग तक अर्थात दसवें अध्याय तक समस्त विश्लेषकों से रहित अक्…
मैं आपको वैसे ही था पहले की भांति सर पर मुकुट धारण किए हाथों में गधा और चक्र किए हुए द…
आपको आगे से अर्थात पूर्व दिशा में और पश्चिम से भी नमस्कार है यह स्वर्ग रूप आपको सब और …
केशव के इन उपयुक्त वचनों को सुनकर अर्जुन काटते हुए हाथ जोड़कर नमस्कार करके फिर श्री कृ…
दादो से युक्त भयंकर विकराल आकृति वाले और कल अग्नि के समान अर्थात पर लाइफ में लोगों को …
आप मुझे पुरुषों द्वारा जाने योग्य परम आचरण स्थान जिसका कभी नाश न हो ऐसे परम ब्रह्म परम…
जो अनेक मुख और नेत्रों वाला है अर्थात जिस रूप में अनेक मुख और नेत्र है तथा अनेक अद्भुत…
जो भगवान की विभूतियों का वर्णन किया गया है उसमें भगवान से कहे हुए मैं इस सारे जगत को ए…
शास्त्रों में मैं दादी जी ऋषि की अस्थियों में से बना हुआ बाजार दूध देने वाले गांव में …
Social Plugin