घोड़े में बेकार रूप सात्विक राजस और तमाशा इन तीनों भावों से अर्थात उपयुक्त राग द्वेष औ…
मुझ परमेश्वर से भारत अतिरिक्त जगत का कारण अन्य कुछ भी नहीं है अर्थात माही जगत का एकमात…
इस लोग द्वारा छठे अध्याय के अंत में प्रार्थना की बीच की स्थापना करके फिर स्वयं ही ऐसा …
योग मार्ग में लगा हुआ योगपष्ट सन्यासी पूर्ण कम करने वाले के अर्थात हाथों में आदि यज्ञ …
हे मा बहू मन चंचल और कठिनता से वास में होने वाले हैं इससे कोई संदेह नहीं किंतु अभ्यास …
एक तत्व भाव में स्थित हुआ जो पूर्व संपूर्ण भूतों में स्थित मूंछ वासुदेव को बचता है इस …
इस स्वाभाविक 200 के कारण जो अंत चंचल है तथा इसलिए जो अस्थिर है ऐसा मन जिस जिस शब्द आदि…
जो खाया जाए वह आहार अर्थात ऑन और चलना फिर आना रूप जो पैरों की क्रिया है वह बिहार यह दो…
ध्यान करने वाला योगी अकेला किसी को साथ ना लेकर पहाड़ की गुफा आदि एकांत स्थान में स्थित…
चिंता का समाधान कर लेने पर वाला जोगी जब इन इंद्रियों के हाथों में अर्थात इंद्रियों के …
स्तुति स्मृति के ज्ञाता पुरुष सर्वकर्म और उसके फल के त्याग रूप जी भाव को वास्तविक सन्य…
यदि ऐसे मन की वह कम केवल मोक्ष के लिए ही होते हैं अर्थात अपने किए हुए कर्मों का जो ईश्…
हेयर थॉट ज्ञान के लिए जो अंतर साधन है उसे ध्यान योग्य के सूत्र रूप इस्पात कृति ब्रह्मा…
जो कर्म और क्रोध इन दोनों 200 से रहित हो चुके हैं उन्होंने अंतरण को अपने वश में कर लिय…
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