जिसकी दक्षता न जानी जा सकती ऐसे प्रेम अपार प्रलय तक मरंपर यंत्र रहने वाले चिंता के आश्…
इस संसार में मनुष्य की दो सृष्टि है जिसकी रचना की जाए वह सृष्टि है आता देवी संपत्ति और…
नवे अध्याय में प्राणियों की देवी आसुरी और राक्षसी यह तीन प्रकार की प्रवृत्तियां बतलाई …
उत्तम अतिशय्याम उत्कृष्ट पुरुष तो अन्य ही है अर्थात इन दोनों से अध्ययन विलक्षण है जो क…
मैं पृथ्वी में प्रविष्ट होकर अपने उसे बोल से जो की कामना और शक्ति से रहित मेरा ऐश्वर्य…
उत्कृष्ट आक्रमण करते हुए अर्थात पहले प्राप्त किए शरीर को छोड़कर जाते हुए तथा शरीर में …
इसका स्वरूप जैसा यह वर्णन किया गया है वैसा उपलब्ध नहीं होता क्योंकि यह स्वप्रभ की वस्त…
क्योंकि कर्म करने वाला का कर्म फल और ज्ञानियों का ज्ञान फल मेरे अधीन है इसलिए जो भक्त …
जो मन और अपमान में समान अर्थात निराकार रहता है तथा मित्र और शत्रु पक्ष के लिए तुल्य है…
हे प्रभु में पूर्व वनीत तीनों गुना से अतीत पर हुआ पुरुष किन-किन लक्षणों से युक्त होता …
जब इस शरीर के समस्त द्वारा में यानी आत्मा की उपलब्धि के द्वारा भूत वह श्रोता आदि सब इं…
मुझे ईश्वर की माया त्रिगुनिया में प्राकृतिक समस्त भूतों की योनि अर्थात कारण है समस्त क…
उत्पन्न होने वाली सभी वस्तुएं क्षेत्र और क्षेत्र यज्ञ की सहयोग से उत्पन्न होती है यह ब…
माया को प्राकृतिक समझना चाहिए इत्यादि मित्रों के अनुसार भगवान का स्त्री गुण आध्यात्मिक…
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